11 मार्च 2020 - 16:40
अचानक अरब देशों को होने लगा एहसास कि सीरिया को गले लगाना बहुत ज़रूरी, अरब लीग भी सीरिया के बग़ैर ख़ुद को अधूरा महसूस कर रहा है!

हालिया कुछ महीनों के भीतर सीरिया के संबंध में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं और यह घटनाएं अरब देशों के स्तर पर हुई हैं। एक बड़ी घटना यह हुई कि मिस्र ने अपने इंटेलीजेन्स चीफ़ अब्बास कामिल को दमिश्क़ की यात्रा पर भेजा।

यह गुप्त दौरा पिछले सप्ताह हुआ जिसमें उत्तरी सीरिया के इदलिब इलाक़े में तुर्की की सैनिक चढ़ाई और लीबिया में तुर्की की तरफ़ से 5 हज़ार से अधिक लड़ाके भेजे जाने के मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा हुई।

लीबिया में तुर्की की ओर से भेजे गए 5 हज़ार लड़ाके वह हैं जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय रूप से आतंकवादी माना गया है। मिस्र को चिंता है कि तुर्की आतंकवादियों को लीबिया भेजकर पड़ोसी देशों मिस्र, ट्यूनीशिया और अलजीरिया की सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरे उत्पन्न कर रहा है जबकि सीरिया में भी तुर्की द्वारा समर्थित आतंकी अशांति फैलाए हुए हैं। मिस्र को यह महसूस हो रहा है कि तुर्की पर अगर अंकुश न लगाया गया तो वह बहुत नुक़सान पहुंचाएगा।

अब्बास कामिल के दमिश्क़ दौरे के आसपास पूर्वी लीबिया पर कंट्रोल रखने वाले ख़लीफ़ा हफ़्तर ने भी दमिश्क़ का दौरा किया और इस बात पर सहमति बनी कि सीरिया में लीबिया के दूतावास को दोबारा खोला जाए।

मिस्र और सीरिया इसी तरह लीबिया और सीरिया के बढ़ते संबंधों से तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान की चिंता बढ़ना तय है क्योंकि इन बढ़ते संबंधों से पश्चिमी एशिया के इलाक़े में एक नया एलायंस बन कर तैयार हो जाएगा।

हालिया दिनों अलजीरिया को भी दमिश्क़ के बारे में बहुत साहसी स्टैंड अपनाते हुए देखा गया है। अरब लीग का अगला शिखर सम्मेलन अलजीरिया में जून से पहले आयोजित होने जा रहा है। अलजीरिया के राष्ट्रपति अब्दुल मजीद तबून ने अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल ग़ैत से दो टूक शब्दों में कहा है कि इस बार का शिखर सम्मेलन पिछली बैठकों से बिल्कुल अलग होगा और अलजीरिया इस सम्मेलन की मेज़बानी तभी करेगा जब सीरिया की सीट पिछले शिखर सम्मेलनों की तरह ख़ाली न रहे बल्कि सीट पर सीरिया के प्रतिनिधि मौजूद रहें।

इसका मतलब है कि अरब लीग के भीतर बदलाव आ रहा है और सीरिया अपना वही रोल हासिल करने जा रहा है जो पहले हुआ करता था। यह सीरिया की विजय को सलाम करने का मामला है। सीरिया ने अपने घटकों की मदद से अपनी ताक़त दिखाई है कि वह अंतर्राष्ट्रीय साज़िश से टकराने और उसे नाकाम बनाने की क्षमता रखता है। यह उन अरब देशों के लिए पाठ है जो अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के डर से थर थर कांपते रहते हैं और बार बार अपमानित होने के बावजूद एक शब्द मुंह से निकालने की हिम्मत नहीं कर पाते।

(रायुल यौम के इनपुट्स के साथ)